कर्मकांड के क्रिया-कृत्य

कर्मकांड के क्रिया-कृत्यों को ही सब कुछ मान बैठना या उन्हें एकदम निरर्थकमान लें, दोनों ही हानिकारक हैं | उनकी सीमा भी समझें, लेकिन महत्व भी न भूलें | संक्षिप्त करें ; पर श्रद्धासिक्त मनोभूमि के साथ ही करें, तभी वह प्रभावशाली बनेगा और उसका उद्येश्य पूरा होगा |

सफलता पाने के सूत्र ।

जीवन में सफलता पाने के जितने साधन बतलाये गये हैं, उनमें विद्वानों ने इन सात बन्धनों को प्रमुख स्थान दिया है-परिश्रम एवं पुरुषार्थ, आत्म विश्वास एवं आत्मनिर्भरता, जिज्ञासा एवं लगन. त्याग एवं बलिदान, स्नेह एवं सहानुभूति, साहस एवं निर्भ.ता, प्रसन्नता एवं मानसिक संतुलन। जो मनुष्य अपने में इन सात साधनों का समावेश कर लेता है, वह किसी भी स्थिति का क्यों न हो, अपनी वांछित सफलता का अवश्य वरण कर लेता है।

क्या सामाजिक संस्कारों की छाप भी मन पर डाली जा सकती है?

यदि समाज का वातावरण बदल दिया जाय, तो सामाजिक संस्कारों की छाप भी मन पर डाली जा सकती है। आज जो अव्यवस्थाएँ पूरे समाज में फैली हैं, उनके लिए सरकार नहीं, हम सभी जिम्मेदार हैं, क्योंकि अभी तक हमारे अंदर राष्ट्रवादी विचारधारा पनप नहीं पाई। भव्य समाज की नव्य संरचना होगी, तभी राष्ट्र अखण्ड एवं सशक्त बन सकेगा।

विचारों की शक्ति

विचारों की शक्ति बड़ी प्रबल मानी गयी है। जितनी भी बड़ी क्रांतियाँ हुई हैं, वे सशक्त विचारों द्वारा ही हुई हैं। साम्यवाद, समाजवाद, नाजीवाद, कार्लमार्क्स-रूसो एवं हिटलर द्वारा फैलाये गये विचारों के सशक्त प्रस्तुतीकरण द्वारा ही विस्तार पा सके थे।

आज के युवा

युवाओं में असीम शक्ति का प्रवाह होता है, प्रतिभा पराकाष्ठा पर होती है, आत्मा में परमात्म शक्ति का तेज होता है एवं बलिदानी साहस होता है। आज वे भटक रहे हैं, राजनीति के मोहरे बन रहे हैं एवं व्यसनों की गिरफ्त में आ रहे हैं।

गुणों का विकाश

यदि आप गुणों का विकाश करने में प्रयत्नशील हों तो संदेह नहीं कि आप सम्मान प्राप्त करेंगे। लोग गुणों की पूजा करते हैं, व्यक्ति की नहीं। सचाई को सिर झुकाते हैं, बनावटीपन को नहीं। टेसू का फूल देखने में बड़ा आकर्षक होता है। किन्तु लोग गुलाब की सुवास को अधिक पसंद करते हैं।