समाज एंव राष्ट्र में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए की यदि कोई सचमुच में प्रतिभावन हो तो उसका विकास हो, उसकी पहचान बनें , उसकी समुचित सम्मान हो । यह हमारा समूहिक कर्तव्य है ; क्योकि प्रतिभावन राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है । वे सामान्य जनों के श्रेष्ठ हैं, इसलिए की उनके विचारों से समाज एंव राष्ट्र को दिशा मिलती है ।

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