जीवन की सर्वोपरि आवश्यकता है – लक्ष्य का चयन।

जीवन की सर्वोपरि आवश्यकता है – लक्ष्य का चयन। इसके लिए परम आवश्यक है – लक्ष्य की खोज। लक्ष्य की खोज करते समय, इसे निर्धारित करते समय अपनी क्षमता, परिस्थिति एवं जीवन – मूल्यों की पड़ताल करना आवश्यक है –,क्योंकि इसी से मिलने वाले तथ्यों का विवेचन-विश्लेषण करके हम सही जीवन-लक्ष्य का निर्धारण कर सकते हैं।

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संसार में कोई भी घटना चमत्कार नहीं है।

महर्षि श्री अरविंद ने कहा है कि संपूर्ण संसार में कोई भी घटना चमत्कार नहीं है। प्रकृति में कभी कोई चमत्कार घटित नहीं होता। जिसे हम चमत्कार समझते हैं,वह मात्र हमारा अज्ञान है ,क्योंकि प्रत्येक घटना मात्र एक सुनिश्चित विधि का परिणाम हाती है।

व्यक्ति अपने भाग्य का निर्माता आप है

व्यक्ति अपने भाग्य का निर्माता आप है,किन्तु यह वाक्य केवल तपस्वियों पर ही लागू होता है,जो अपनी प्रचंड तप-ऊर्जा द्वारा इन संस्कारों को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। तपस्वी अपने जीवन की दिशा स्वयं निर्धारित करते हैं ,किन्तु सामान्य व्यक्तियों का जीवन तो पूर्णत: संस्कारों के अधीन होता है।

सौंदर्य बोध है

सौंदर्य बोध है , जिसे अनुभव किया जाता है जो गहराई मे आकर हमारे भाव को कूदेरता है । व्यक्तित्व का सौंदर्य तो उसके आंतरिक गुणो एंव विशेषताओ मे निहित है । हमारी प्रतिभा सुदंरता का परिचायक है । प्रतिभावान व्यक्तित्व का सौंदर्य निराला होता है ।

सबसे सुंदर वस्तु है हमारी मौलिकता ।

सबसे सुंदर वस्तु है हमारी मौलिकता । हम जैसे है , वैसे ही सुंदर है । वास्तविक सौंदर्य हमारे विचारों एंव भावनाओ मे है , हमारे व्यहार एंव कर्म में समाहित है । हम इन्हे जितना अधिक निखारेंगे , नपाएंगे , गलाएंगे ये हमारे व्यक्तित्व को उतना ही अलंकृत कर देंगे।

जिंदगी की वास्तविक समझ अनुभव से पैदा होती है।

जिंदगी की वास्तविक समझ अनुभव से पैदा होती है। हम अपनी क्षमताओं का समुचित आकलन एंव नियोजन अनुभव करके ही कर सकते है । अनुभव किए बगैर न तो हम अपनी ज़िंदगी जी सकते है और न अपने अंदर दिव्य क्षमताओं का परिचय पा सकते है ।

जीवन मे असीम क्षमताएँ समाई हुई है ।

जीवन मे असीम क्षमताएँ समाई हुई है । क्षमताओं को हम निखार सकते हैं और इन्हे कुंद कर राख की परतों में दबा सकते है । क्षमता को सतत प्रक्रिया से उभरा जा सकता है । निरंतर प्रयास से क्षमता निखरती है , परंतु इससे ठीक विपरीत रुक जाने से यह छिप जाती है । जो उसे महसूस करता है , उसे अंगारो के समान धधका देता है ।