नया साल आप सबों के लिए मंगलमय हो 

​प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ बिहार की ओर से आप सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.

नया साल आप सबों के लिए मंगलमय हो 

ईश्वर की भक्ति की ओर हम अपने जीवन को समर्पित करते हुए अपने जीवन को सफल बनाये

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स्वतन्त्रता के आनंद की फसल

जो स्वतन्त्रता के आनंद की फसल चाहते है ,उन्हें ऐसे बीज बोने और उसकी रक्षा करने के लिये अधिक परिश्रम और अतोला बलिदान देना होगा । अंधविश्वास और रूढ़िवाद पर आधारित शासन जनहित का संपदान नहीं कर सकता और न उग्रवादी शासन अपनी रक्षा कर सकता हैं ?

​अच्छा लगता है जब कोई तारीफ करता है। 

​अच्छा लगता है जब कोई तारीफ करता है। आसान नहीं होता ऐसे लोगों से दूर होना या फिर उन्हें गलत ठहराना, जो सही-गलत हर बात पर आपकी तारीफ करते हैं। लेकिन चाणक्य कहते हैं, चापलूसी करने वाले से सदा बचे रहें। ऐसा व्यक्ति बड़ा भारी चोर होता है। वह आपको मूर्ख बनाकर आपका समय भी चुराता है और बुद्धि भी।

प्रतिभाएँ हर युग में तथा जीवन के हर क्षेत्र में देखी जाती हैं |

प्रतिभाएँ हर युग में तथा जीवन के हर क्षेत्र में देखी जाती हैं | प्रतिभाएँ अनगढ़ भी होती हैं और परिष्कृत भी | अनगढ़ प्रतिभा अनगढ़ कार्यों में तथा परिष्कृत प्रतिभा लोकहितकारी परिष्कृत उद्येश्यों में सहज ही प्रवृत्त हो जाती है | अनगढ़-अपरिष्कृत प्रतिभाओं को पौराणिक उद्येश्यों में सहज ही प्रवृत्त हो जाती है | अनगढ़-अपरिष्कृत प्रतिभाओं को पौराणिक काल के राक्षसों से लेकर वर्तमान में परपीड़ा के – राक्षसी कार्यों में प्रवृत्त देखा जा सकता है | परिष्कृत प्रतिभाएँ, अवतारियों, पैगम्बरों, ऋषियों से लेकर संत-शहीदों के रूप में परिलक्षित होती रहती हैं |

स्वाध्याय को जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए

सकारात्मक विचार के अतिरिक्त हमें सतत ईश्वर स्मरण के साथ-साथ स्वाध्याय को जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए, क्योंकि यही एक ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा हमारा मस्तिष्क शुभ व सृजनात्मक विचारों द्वारा परिपोषित होता है और हमें अपने जीवन के नए आयामों से परिचय कराता है।

सुंदर चेहरों को देखकर आकर्षित हो जाते हैं

सुंदर चेहरों को देखकर आकर्षित हो जाते हैं और उस सौन्दर्य की ललक हमें बेताब बना देती है, किन्तु जब हम उसके नजदीक जाते हैं उसके साथ समय गुजारते हैं, तब पता लगता है की ये सुन्दरता केवल ऊपरी थी भीतर कुछ नहीं था जैसे नकली फूल ऊपर से सुंदर दिखते हैं सजावट के काम भी आते हैं,किन्तु उनके नजदीक जाओ, तो वे खुशबू नहीं दे सकते, वे किसी भँवरे को आकर्षित नहीं कर सकते हैं उनमें पराक्रम नहीं हैं।

सार्थकता ही अनुभूति न होने पर मनुष्य जिंदगी को लाश की तरह ढोता है

यदि मनुष्य यह अनुभव करता है की उसका जीवन निरर्थक है, उसका मन और शरीर कभी स्वस्थ नहीं रहेगा। सार्थकता ही अनुभूति न होने पर मनुष्य जिंदगी को लाश की तरह ढोता है और उस नीरस-निरानंद स्थिति में सचमुच ही जीवन बहुत बोझिल लगता है।