सारी समस्याओं को सुलझाने की कुंजी अपने अंदर है।

सारी समस्याओं को सुलझाने की कुंजी अपने अंदर है। दूसरे लोगों से जिस बात की आशा करते है, उसको योग्यता अपने अंदर पैदा कीजिये तो बिना मांगे अनायास ही वह इच्छाएँ पूरी होने लगेंगी।

Advertisements

एक विचार ले लो।

एक विचार ले लो। उसी एक विचार के अनुसार अपने जीवन को बनाओ उसी को सोचो, उसी का स्वप्न देखो और उसी पर अवलंबित रहो। अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, स्नायुओं और शरीर के प्रत्येक भाग को उसी विचार से ओत प्रोत होने दो और दूसरे सब विचारो को अपने से दूर रखो यही सफलता का रास्ता है और यही वह मार्ग है जिसने महान धार्मिक पुरुषो का निर्माण किया है।

युवाओं में असीम शक्ति का प्रवाह होता ह

युवाओं में असीम शक्ति का प्रवाह होता है, प्रतिभा पराकाष्ठा पर होती है, आत्मा में परमात्म शक्ति का तेज होता है एवं बलिदानी साहस होता है। आज वे भटक रहे हैं, राजनीति के मोहरे बन रहे हैं एवं व्यसनों की गिरफ्त में आ रहे हैं।

संसार को त्रस्त कर रही वर्तमान परिस्थितियों से हम सभी अवगत हैं |

संसार को त्रस्त कर रही वर्तमान परिस्थितियों से हम सभी अवगत हैं | चारों और शोषण, अत्याचार, अनाचार, का एकछत्र राज्य है | प्रत्येक व्यक्ति अशांत और असंतुलित है, अत्याचारी भी और पीड़ित भी | प्रकृति और मानव दोनों की उग्रता चरम सीमा पर है | इन उग्राताओं ने व्यक्ति के विचार और व्यव्हार बदल डाले हैं, मानव -मूल्यों को लुप्तप्राय कर दिया है और जीवन जीने के उद्देश्यों को ही तहस -नहस कर दिया है और लगता कि हम सब जलते हुए नरक में जी रहे हैं |

जिंदगी का हर पल हमें कुछ सिखाकर जाता है

जिंदगी का हर पल हमें कुछ सिखाकर जाता है, लेकिन यदि व्यक्ति बिलकुल भी होश में नहीं है, तो वह इसका लाभ नहीं ले सकता अन्यथा जीवन में मिलने वाली असफलताएं, परेशानियाँ, चुनौतियाँ,अपमान, शारीरिक व मानसिक कष्ट यह बताते हैं कि जिंदगी जीने में कहीं कोई भूल हुई है, जिसका परिणाम आज भुगतना पड़ रहा है। यदि आज भी इसके तौर-तरीके नहीं सीखे गए और इन भूलों को दोहराते रह गए तो आने वाला भविष्य अंधकारमय-कष्टमय हो सकता है। निश्चित तौर पर जीवन को सँवारने के लिए जीवन को गहराई से समझना जरूरी है।

पुरुषार्थ ही हमारी स्वतन्त्रता और सभ्यता की रक्षा करने के लिए ढृढ़ दुर्ग है जिसे कोई भी बेध नहीं सकता । यदि हमे कुछ करना है ,स्वतंत्र रहना है , जीवित रहना है तो एक ही रास्ता है -पुरुषार्थ की उपासना का । पुरुषार्थ ही हमारे जीवन का मूल मंत्र है।

समय का सदुपयोग

जिस व्यक्ति में समय को खर्चने की, उसका सदुपयोग करने की सामर्थ्य नहीं होती तो समय उसे खर्च कर देता है। दिन -रात के चौबीस घंटे कम नहीं होते। इस समय को हम किस प्रकार व्यतीत करते हैं, इसका लेखा -जोखा करते चले तो हमें ज्ञात हो जाता है कि हम जी रहे हैं या समय को व्यर्थ गँवाकर एक प्रकार की आत्महत्या कर रहे हैं।