कार्य किस भावना से किया जाता है यह महत्वपूर्ण है

किसी भी कार्य को करते समय यह महत्वपूर्ण नहीं होता कि वह छोटा है या बड़ा, वरन यह महत्वपूर्ण होता है कि उसे किस भावना व किस दृष्टिकोण से किया गया है। निश्चित रूप से कार्य कुशलता जरूरी है।

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कार्य पूरे मन से किया जाए,

कार्यकुशलता, कार्य को सही से करने व अच्छे परिणाम देने में हमारी मदद करती है और हमारे लिए उन्नति के द्वार भी खोलती है। इसलिए चाहे जो भी कार्य किया जाए, उसे पूरे मन से किया जाए, पूरी कुशलता के साथ किया जाए, तभी हमें उस काम का यथोचित लाभ मिलता है और हमारा मन संतुष्ट होता है।

कार्य चाहे जो भी हो, उससे प्यार करना हमारे व्यक्तित्व निर्माण का एक बड़ा हिस्सा है।

कार्य चाहे जो भी हो, उससे प्यार करना हमारे व्यक्तित्व निर्माण का एक बड़ा हिस्सा है। हर काम को सम्मान देने वाले लोग ज्यादा शालीन, ज्यादा विनम्र, अधिक संवेदनशील व समझदार होते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि परिवार में बच्चों को कार्य का महत्व समझाया जाए, ऐसा करने पर ही हमारी पीढ़ी का कार्य के प्रति नजरिया बदलेगा और भविष्य में वे समाज को अपनी उत्कृष्ट सेवाएँ दे सकेंगे।

कभी भी अपने संघर्ष व छोटे समझे जाने वाले कार्यों के प्रति शर्मिंदा न हो

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रेगन जिन्होंने सर्कस में काम किया, लाइफगार्ड का काम करते हुए 77 लोगों को डूबने से बचाया, कैफेटेरिया में टेबल साफ करने की डयूटी सँभाली, धीरे-धीरे वे बढ़ते गए और एक दिन राष्ट्रपति भी बन गए। लेकिन कभी भी अपने बीते समय में किए गए संधर्ष व छोटे समझे जाने वाले कार्यों के प्रति शर्मिंदा नहीं हुए, बल्कि गौरवान्वित ही हुए तथा उनकी यह आत्मनिर्भरता ही उन्हें शिखर पर ले जा सकी।

हर कार्य मूल्यवान होता है, कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता।

हर कार्य मूल्यवान होता है, कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। यदि नेकनीयत से कार्य किया जाए तो छोटा-सा कार्य भी व्यक्ति को शिखर तक पहुँचा सकता है और लापरवाही के साथ किया गया बड़ा काम भी व्यक्ति को उच्च शिखर से नीचे गिरा सकता है।

कार्य के प्रति सदैव सम्मान का भाव रखो। यही जीवन में सफलता का मूल मंत्र है।

युगऋषि परामपूज्य गुरुदेव का कहना था की हर तरह का काम करना सीखो, झारू भी पूरे मन से लगाओ और शौचालय भी अच्छे से साफ करो। यदि तुम जीवन में छोटे व महत्वहीन समझे जाने वाले काम अच्छे से कर लेते हो, तो बड़े-बड़े काम भी बढ़िया से कर लोगे। इसलिए कार्य के प्रति सदैव सम्मान का भाव रखो। यही जीवन में सफलता का मूल मंत्र है।

भय व्यक्ति को अपने वर्तमान में रहने नहीं देता।

भय से मनुष्य का मन इतना सशंकित व आतंकित हो जाता है कि कदम आगे बढ़ाने की सोचने से पहले ही व्यक्ति अपने कदम पीछे खींच लेता है। इस तरह भय व्यक्ति को अपने वर्तमान में रहने नहीं देता। वह भविष्य को लेकर सदैव चेतावनी देता रहता है और इसके कारण व्यक्ति खुलकर जी नहीं पाता है।