चित की प्रवृति

शंका रहित चित से प्रारंभ किए गए कार्य सफलता का संकेत है। इसी प्रकार जिन कार्यो को या निर्णयों को लेते समय मन में उत्साह का अभाव हो, चित बोझिल हो, वहाँ ठहर जाओ। यह संकेत है कि अभी समय उपयुक्त नहीं है। चित में प्रसन्नता व उत्साह किसी भी कार्य को करने का श्रेष्ठ मुहूर्त है।

सकारात्मक विचार …

सकारात्मक विचार के अतिरिक्त हमें सतत ईश्वर स्मरण के साथ-साथ स्वाध्याय को जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए, क्योंकि यही एक ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा हमारा मस्तिष्क शुभ व सृजनात्मक विचारों द्वारा परिपोषित होता है और हमें अपने जीवन के नए आयामों से परिचय कराता है।

जीवन एक संग्राम है…

जीवन एक संग्राम है। जिसमें विजय केवल उन्हीं को मिलती है, जो दृढ़ और उन्नत मनोबल का कवच धारण किए रहते हैं और जो अपने निहित पराक्रम और पौरुष की उत्कृष्टता सिद्ध करते हैं। शारीरिक स्वास्थ ठीक हो, पर मनोबल न हो, तो आदमी मानसिक आघात से अकाल मृत्यु को प्राप्त होता है। अविकसित मनोबल होने के कारण हमारी योजनाएँ सफल नहीं होती । हमारा मन हारा रहता है तो शरीर भी हारता है और हम पराजित हो जाते हैं।

प्रतिभा किसी पर आसानी से नहीं बरसती, वह तो अंदर से जागती है।

पारस को छू कर लोहा सोना बनता भी है या नहीं ? इसमें किसी को संदेह हो सकता है, पर यह सुनिश्चित है कि महाप्रतापी-आत्मबलसंपन्न व्यक्ति असंख्यों को अपना अनुयायी-सहयोगी बना लेते हैं। इन्हीं प्रतिभावानों ने सदा से जमाने को बदला है- परिवर्तन की पृष्ठभूमि बनाई है। प्रतिभा किसी पर आसानी से नहीं बरसती, वह तो अंदर से जागती है।

इस सृष्टि का कोई नियंता भी है।

इस सृष्टि का कोई नियंता भी है। उसने अपनी समग्र कलाकारिता बटोर कर इस धरती को और उसकी व्यवस्था के लिए मनुष्य को बनाया है। वह इसका विनाश होते देख नहीं सकता। नियंता ने सामयिक निर्णय लिया है कि विनाश को निरस्त करके संतुलन की पुनः स्थापना की जाए।

पदार्थों एंव जीवों में अन्तनिर्हित ऊर्जा वास्तव में विस्मयकारीणि है।

प्रकृति के प्रकोप, झंझा, भूचाल, प्रलय-करी वर्षा, अनावृष्टि आदि पदार्थों के अणुओं में निहित जीवनदायिनी शक्ति को झकझोर कर बाहर प्रकट करते हैं और वे समस्त विपतियों का सामना करने में समर्थ हो जाते हैं। ठीक इसी प्रकार संकट के समय हमारी अन्तनिर्हित शक्ति, हमारी सहायता करके हमको आश्चर्यचकित कर देती हैं। पदार्थों एंव जीवों में अन्तनिर्हित ऊर्जा वास्तव में विस्मयकारीणि है।

जो चीज जीतनी छोटी होती है उतनी ही शक्तिशाली होती है।

किसी विद्वान ने कदाचित सही कहा है कि जो चीज जीतनी छोटी होती है उतनी ही शक्तिशाली होती है। एक अणु जो आँखों से दिखाई नहीं देता, अपार ऊर्जा का भण्डार होता हैं। यह ऊर्जा रचनात्मक भी हो सकती हैं एंव विध्वंसक भी। आश्चर्यजनक तथ्य तो यह है कि अणु को हम वैज्ञानिक माध्यमों से देख सकते हैं, किन्तु जिसे हम देख भी नहीं सकते वह समूचे ब्रह्मांड के संचालन कि शक्ति रखता है। इसे विश्व भगवान के नाम से जानता है।

गाढ़े समय का भय नहीं पालना चाहिए।

कर्म के नियम के अनुसार गाढ़ा समय यदि आना है, तो आएगा और तथाकथित शक्तिशाली लोग भी उसे नहीं रोक सकेंगे। व्यावहारिक रूप से भी यह देखा जाता है कि गाढ़ा समय आने पर अपने पराए हो जाते हैं, उल्टे वे भी कहने लगते हैं कि ऐसा नहीं करना चाहिए था। अतएव गाढ़े समय का भय नहीं पालना चाहिए। कर्म सिद्धांत एंव कर्मानुबन्ध सिद्धांत का सतत मनन, चिंतन करने पर गाढ़े समय का भय शनैः–शनैः छूटने लगता है। इस चिंतन को आचरण करने वाला व्यक्ति ही महान बन जाता है।

वितैषणा का निहितार्थ धनार्जन से हैं।

वितैषणा का निहितार्थ धनार्जन से हैं। धनार्जन कि इच्छा हर व्यक्ति में होती हैं और होनी चाहिए। समाज कि स्वस्थ अवधारणा को सुदृढ़ करने की दृष्टि से उचित साधनों से धनार्जन को ही मान्यता प्रदान की गई है। अन्याय अथवा अनुचित साधनो द्वारा अर्जित धन को मुल्य आधारित किसी समाज ने नहीं माना हैं। आज भी बड़े-से-बड़ा भ्रष्टाचारी भी अपने कोभ्रष्टाचारी के रूप में समाज के सम्मुख प्रस्तुत नहीं करना चाहेगा। कुअवसर आने पर अपने को दूध का घुला ही प्रमाणित करने का प्रयत्न्न करेगा।

मन की मजबूती और कष्ट झेलने की ताकत कोई प्राकृतिक गुण नहीं है।

मन की मजबूती और कष्ट झेलने की ताकत कोई प्राकृतिक गुण नहीं है। यह हमारे चरित्र में तब समा जाते हैं, जब हम आग के दरिया को पार करते है। आपमें आपके अंदाजे से कहीं ज्यादा ताकत होती है। और यह ताकत बाहर निकलती हैं कठिन परिस्थियां। चुनौतिपूर्ण स्थितियां व्यक्ति के साहस, उसके ज्ञान और विवेक से परिचय भी कराती हैं और उन्हें विस्तार भी देती हैं। जब आप अपनी मानसिक, शारीरिक आध्यात्मिक या भावनात्मक क्षमताओं पर दबाव डालते हैं, तो दरअसल उन्हें और विस्तार दे रहे होते हैं।