विषमता एंव चुनौतियाँ हमें सुदृढ़, मजबूत एंव फौलाद बनाने आती हैं

साधन एंव सुविधाओं से कोसों दूर क्रांतिवीर आजाद,भगत ,सुभाष आदि ने युद्ध-तकनीकों के विशेषज्ञ अंग्रेजों को ऐसी पटखनी दी, जिसे वे अब भी विस्मरण करना चाहते हैं। वस्तुतः विषमता एंव चुनौतियाँ हमें सुदृढ़, मजबूत एंव फौलाद बनाने आती हैं, परंतु हम इन्हें किस रूप में लेते हैं यही महत्वपूर्ण है।

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जीवन की यात्रा विकसमान होनी चाहिए।

जीवन से प्राप्त सभी तलों एंव स्तरों का अनुभव करते हुए सतत बढ़ते रहने की आवश्यकता हैं। जीवन शाश्वत एंव सनातन है, इसकी यात्रा भी सतत विकासमान होनी चाहिए । देह, समाज आदि सभी तल तो मात्र इसकी यात्रा के पड़ाव है। पड़ाव में रुककर लक्ष्य तक नहीं पहुंचा जा सकता है।  लक्ष्य तक पहुँचने के लिए वर्तमान जीवन का बेहतरीन उपयोंग कर भविष्य कि सुनियोजित तैयारी करनी चाहिए।

सफाई अभियान

बिगाड़ने वाले जब इतनी निर्भीकतापूर्वक विनाश पर उतारू हैं तो देवत्व के पक्षघर लोगों के लिए यह उचित नहीं की चुपचाप बैठे रहें । यदि बिगड़ने वाले हाथों को रोक सक्ने की सामर्थ्य न हो तो कम से कम सफाई की व्यवस्था तो करनी ही चाहिए । यह सरलतम और सफलतम उपचार है। इतना तो नगरपालिकाओं के मेहतर तक करते रहते है।

छठ पर्व में सूर्य की उपासना से सत्कर्मों और सदबुद्धि की प्राप्ति है।

सूर्य देव से ही इस संसार में उर्जा का प्रवाह हो रहा है। समस्त जगत के प्राणियों में उनका अंश विद्यमान है। छठ पर्व में सूर्य की उपासना से सत्कर्मों और सदबुद्धि की प्राप्ति है। सूर्य के तेज से हमारे कुविचार समाप्त होते है और नविन चेतना का सृजन होता है।

तुलसी आरोपण एक महान अभियान

तुलसी आरोपण को एक महान अभियान का प्रथम चरण माना जाना चाहिए और उसे सफल लोकप्रिय बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। धरती से आहार, बादलों से जल, आकाश से प्राणवायु खींचकर देने वाले इस तंत्र की श्रद्धा-संवद्धन , अंतरिक्ष संशोधन के लिए ईश्वर की वनस्पति प्रतिमा की स्थापना–आराधना का आंदोलन हर किसी के लिए लाभप्रद भी है और सरल भी ।

आदर्श का मिलना एक महान घटना है

आदर्श का मिलना एक महान घटना है, परंतु आदर्श के प्रति समर्पण का बहव एक अत्यंत दुर्लभ घटना है। देने के लिए, अनुदान के लुटाने लिए गुरु सदैव तत्पर होता है, लेने वालों की कमी होती है। गुरु का अनुदान तो सहज ही बादलों जैसे बरस पड़ता है, परंतु हम भिखारी के समान रहते हैं । लोभ ललचाता है, वासना सताती है, क्रोध का वेग झेला नहीं जाता, ऐसे में यदि हम कहते है की काश कोई मिलता। अगर मिलता भी तो कुछ नहीं होता, हम वहीं के वहीं खड़े मिलते, जहाँ वर्तमान में हैं।

अब्राहम लिंकन का जीवन

न्याय और संनता के लिए अपने प्राणों की आहुती दे देने वाले अब्राहम लिंकन को तो अपने जीवन में असफलताओं का मुँह एतनी बार देखना पड़ा की यदि उनके जीवन के सभी कार्यों का हिसाब लगाया जाए तो वे सौ में से निन्यानवें बार असफल हुए ।