अपने व्यक्तित्व को ऊँचा उठाने की बात सोचिए।

अपने व्यक्तित्व को ऊँचा उठाने की बात सोचिए। इतना अगर आप सोच सकते हों,तो फिर आप देखना किस कदर आपको भगवान की सहायता मिलती है और देवताओं की।

शिक्षा की सार्थकता

शिक्षा की सार्थकता तभी है, जब वह शिक्षार्थी को मानवी गरिमा के अनुरूप सतप्रवृतियों में अभ्यस्त करा सके। जिन्हें ऐसी सतशिक्षा नहीं मिल पाती, वे उजड्ड,गँवार स्तर के पिछड़े हुए ही रह जाते हैं।

संसार में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं,जिसकी प्राप्ति मनुष्य के लिए असंभव हो

संसार में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं,जिसकी प्राप्ति मनुष्य के लिए असंभव हो।प्रयत्न से सभी कुछ पाया जा सकता है,लेकिन एक ऐसी चीज है जिसे एक बार गँवाने के बाद कभी नहीं पाया जा सकता और वह है समय। एक बार हाथ से निकला हुआ समय फिर कभी नहीं मिलता।

अंह का सुख

मान – बड़ाई, यश – प्रतिष्ठा से जो अंह का सुख मिलता है , उसमें भी बाधाएं कम नहीं हैं। प्रत्यक्ष में तो मान – सम्मान,यश और बड़ाई पाने वाला व्यक्ति बड़ा बलवान नजर आता है, लेकिन यथार्थ में ऐसा होता नहीं , कहीं अंतस् में वह बड़ा ही कायर और डरपोक होता है।

अपनी ही बात हम सब सोचते हैं ।

अपनी ही बात हम सब सोचते हैं । समूहगत भाबनाएँ उठती ही नहीं । समाज सेवा के कार्य में जब तक उत्साह न उठेगा,तब तक उस मन के बारे में यह नहीं कहा जा सकेगा कि उसके भीतर अध्यात्म का प्रकाश आ गया ।   

किसी अपराध को छिपाना हितकर नहीं

छिपाने,समझौता कर लेने से सामयिक निन्दा से तो बचा जा सकता है,पर इससे सड़न का विष भीतर ही भीतर पनपता रहेगा और पूरे अंग को गलाकर नष्ट कर देगा ।