काम टालने की प्रवृति से बहुत सी हानियाँ हैं……

काम टालने की प्रवृति से बहुत सी हानियाँ हैं। इससे हमारी कार्यकुशलता पर प्रभाव पड़ता है। जैसे-जैसे हम कम टालते जाते हैं, वैसे-वैसे उनकी संख्या बढ़ती जाती है। परिणाम यह होता है कि कामों के ढेर पर जब हमारी दृष्टि जाती है तो खीझकर उनकी ओर से अपनी दृष्टि हटा लेते हैं और सारे कार्य अपूर्ण ही बने रहते हैं।

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अंतर्मुखी बनो और अपने अंतःक्षेत्र को संभालने-सुधारने में लग जाओ…..

पर्वतों की कंदरा मत ढूंढो। जमीन में गुफा न खोदो। अंतर्मुखी बनो और अपने अंतःक्षेत्र को संभालने-सुधारने में लग जाओ, एकांत साधना का यही सही स्वरूप है। इसके लिए कोलाहल-रहित स्थान ढूँढने मात्र से ही काम चल जाएगा।

ध्यान द्वारा साधक अपनी आदतों, व्याहर को बदल सकता है….

ध्यान निठ्ल्लो की तरह बैठने की प्रक्रिया नहीं है। अपने अंदर के अचेतन को ढीला करना ही ध्यान है। ध्यान अंतश्चेतना का स्नान है। ध्यान में दमन नहीं रूपान्तरण किया जाता है। ध्यान द्वारा साधक अपनी आदतों, व्याहर को बदल सकता है, विचारों में परिवर्तन कर सकता है, संस्कारों को बदल सकता है एवं औरों के विचारों को प्रभावित कर उन्हें भी बदल सकता है।

मनुष्यता सीखने की सबसे बड़ी पाठशाला….

मनुष्यता सीखने की सबसे बड़ी पाठशाला अपना घर है। स्नेह और त्याग, क्षमा और उदारता की भावनाओं के विकास के जीतने सुंदर अवसर अपने घर में मिल सकते हैं, उतने और कहीं नहीं मिल सकते।

सफलता पाने की क्रियाशीलता और चेतना …….

अब सोने का युग बीत गया। अंधविश्वास, पुराने रीति-रिवाज अब धीरे-धीरे दूर हो रहे हैं। बुद्धि और विवेक जाग रहे है। आलस्य उड़ता जा रहा है। आगे बढ़ने, सफलता पाने की क्रियाशीलता और चेतना के सभी ओर दर्शन होने लगे हैं। बुराइयों के स्थान पर अच्छाइयों का बढ़ना मंगलमय भविष्य का प्रतीक है।

देश और काल के विकृत होने पर औषधियाँ भी…….

वायु, जल, देश और काल के विकृत होने पर औषधियाँ भी अपना प्रभाव खो देती हैं। ऐसा होने पर समूची सृष्टि रोगी हो जाती है, किन्तु उनसे मुक्ति के लिए औषधि सेवन के अलावा, जो उपाय अपनाए जाने चाहिए, वे हैं- सत्य बोलना, जीव मात्र पर दया, दान, बलिबाईश्व, देव पुजा, सडवृत्त-पालन, शांति, आत्मरक्षा, ब्रह्मचर्य-पालन, धार्मिक कथाओं का श्रवण-मनन, जितेंद्रिय महर्षियों की सेवा, सात्त्विक-धार्मिक लोगों की संगति आदि। इन उपायों से भयंकर काल में भी मनुष्य की रक्षा हो सकती है।