आत्मबोध का प्रकाश

पतंगे को दीपक का प्रकाश मिल जाए तो फिर वह अँधेरे में नहीं लौटता,भले ही उसे दीपक के साथ प्राण गँवाने पड़ें। जिन्हें आत्मबोध का प्रकाश मिल जाता है,वे अविधा के अंधकार में नहीं भटकते। भले ही उन्हें धर्म के मार्ग में अपना सर्वस्व समाप्त करना पड़े।

प्रतिभा का धनी न कभी हारता है और न कभी अभावग्रस्त रहने की शिकायत करता है। उसे किसी पर दोषारोपण करने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती कि उन्हें अमुक सहयोग नहीं दिया या प्रगति-पाठ को रोके रहने वाला अवरोध अटकाया। प्रतिभावान ही तो शालीनता और प्रगतिशीलता का अधिष्ठाता सिधपुरुष होता है।

प्रतिभा तेजस्विता को कहते हैं।

प्रतिभा तेजस्विता को कहते हैं। यह चेहरे की चमक या चतुरता नहीं, वरन मनोबल पर आधारित ऊर्जा है। तेजस्विता तपश्चर्या की उपलब्धि है, जो निजी जीवन से संयम-साधना और सामाजिक जीवन में परमार्थपरायणता के फलस्वरूप उद्भूत होती है। संयम अर्थात अनुशासन का, आत्मनियंत्रण का कठोरतापूर्वक परिपालन। जो इतना कर सकें, उन्हीं से परमार्थ साधता है।

आतमोन्नति के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहोगे।………

यदि कुछ देना चाहते हो, तो एक वचन दो कि तुम अडिगता से अध्यात्म-मार्ग पर चलोगे। आतमोन्नति के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहोगे। अज्ञानता के अंधकार में डूबे इस समाज को ज्ञान के दीपक से आलोकित करोगे। यही मेरी गुरु-दक्षिणा होगी।

आत्मविश्वास उत्पन्न करें, उसकी प्रशंसा करें………….

बच्चों को मानसिक दृष्टि से विकसित बनाने के लिए अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों में आत्मविश्वास उत्पन्न करें, उसकी प्रशंसा करें और कार्य करने के लिए प्रेरित, प्रोत्साहित करें। कोई भूल कर लेता है तो उसे डाँटने- फटकारने के बजाए प्यार से समझाएँ । सभी बच्चों के साथ समान रूप से स्नेहपूर्ण व्यवहार करें।

आत्महिनताग्रस्त लोग मनुष्यों की भीड़ में वैसे ही बन ……..

दूध में पानी मिलाया जाए तो घुल जाएगा, किन्तु उसी से निकाला हुया मक्खन ऊपर तैरता रहता है। आत्महिनताग्रस्त लोग मनुष्यों की भीड़ में वैसे ही बन जाते हैं, किन्तु ज्ञानी पुरुष अपना व्यक्तित्व बुरों के बीच भी ऊँचा बनाए रखतें हैं।

एकांगी भावनाएँ भी उपयोगी नहीं सिद्ध होती

एकांगी भावनाएँ भी उपयोगी नहीं सिद्ध होती । विचारों से शून्य भावनाओ के अतिरेक में बहता हुआ हृदय भी वज्ञानिक दृष्टि से हानिकारक है ।