जीने का अर्थ है विचारों से मुक्त हो जाना; क्योंकि विचार ………

वर्तमान में जीने का अर्थ है विचारों से मुक्त हो जाना; क्योंकि विचार या तो अतीत की स्मृति का हिस्सा होता है अथवा भविष्य कि कल्पना का । इन दोनों से जब भी, जहाँ भी मुक्त हुया जा सके, वहीं उसी क्षण एकाग्रता प्रकट हो जाती है।

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प्रतिभा का धनी…

प्रतिभा का धनी न कभी हारता है और न कभी अभावग्रस्त रहने की शिकायत करता है। उसे किसी पर दोषारोपण करने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती कि उन्हें अमुक सहयोग नहीं दिया या प्रगति-पाठ को रोके रहने वाला अवरोध अटकाया। प्रतिभावान ही तो शालीनता और प्रगतिशीलता का अधिष्ठाता सिधपुरुष होता है।

इस संसार में सुखपूर्वक और उपयोगी रूप से

स्वयं अपना पूर्ण परिचय प्राप्त करना ही अंतर्ज्ञान है, जिससे पता चलता है कि हम क्या हैं और क्या होना चाहिए, जिससे हम इस संसार में सुखपूर्वक और उपयोगी रूप से और ईस लोक में शांति तथा आनंद से रह सकें।

संस्कारों के अधीन होता है।

व्यक्ति अपने भाग्य का निर्माता आप है,किन्तु यह वाक्य केवल तपस्वियों पर ही लागू होता है,जो अपनी प्रचंड तप-ऊर्जा द्वारा इन संस्कारों को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। तपस्वी अपने जीवन की दिशा स्वयं निर्धारित करते हैं ,किन्तु सामान्य व्यक्तियों का जीवन तो पूर्णत: संस्कारों के अधीन होता है।

संपूर्ण संसार में कोई भी घटना चमत्का नहीं है।

महर्षि श्रीअरविंद ने कहा है कि संपूर्ण संसार में कोई भी घटना चमत्का नहीं है। प्रकृति में कभी कोई चमत्कार घटित नहीं होता। जिसे हम चमत्कार समझते हैं,वह मात्र हमारा अज्ञान है ,क्योंकि प्रत्येक घटना मात्र एक सुनिश्चित विधि का परिणाम हाती है।

प्रकृति में कभी कोई चमत्कार घटित नहीं होता………

महर्षि श्रीअरविंद ने कहा है कि संपूर्ण संसार में कोई भी घटना चमत्कार नहीं है। प्रकृति में कभी कोई चमत्कार घटित नहीं होता। जिसे हम चमत्कार समझते हैं,वह मात्र हमारा अज्ञान है ,क्योंकि प्रत्येक घटना मात्र एक सुनिश्चित विधि का परिणाम हाती है।

लक्ष्य की खोज……..

जीवन की सर्वोपरि आवश्यकता है – लक्ष्य का चयन। इसके लिए परम आवश्यक है – लक्ष्य की खोज। लक्ष्य की खोज करते समय, इसे निर्धारित करते समय अपनी क्षमता, परिस्थिति एवं जीवन – मूल्यों की पड़ताल करना आवश्यक है –,क्योंकि इसी से मिलने वाले तथ्यों का विवेचन-विश्लेषण करके हम सही जीवन-लक्ष्य का निर्धारण कर सकते हैं।