जीवन की अनंत संभावनाएँ …………..

जीवन की अनंत संभावनाएँ है । हमें उचित मार्गदर्शन के पास जाकर अपनी मौलिक संभावनाएँ की तलाश करनी चाहिए । अपने विचारों को विधेयात्म्क बनाते हुए भावनाओ को पवित्र बनाना चाहिए । सदा औरों के प्रति प्रेमपूर्ण सद्व्यवहार करने से हमारे जीवन में भी खुशी आ सकती हैं ।

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मित्रता मनुष्य जीवन के लिए बड़ा महत्वपूर्ण तत्व है |

मित्रता मनुष्य जीवन के लिए बड़ा महत्वपूर्ण तत्व है | जिसे जीवन में मित्रों का अभाव नहीं रहता ,उसकी ज़िंदगी अपेक्षाकृत अधिक सरस ,सफल तथा मोद विनोद से भरी -पूरी रहती है |उसे कभी एकाकीपन अथवा सूनापन खटकने नहीं पाता | उसकी ज़िंदगी में एक रस ,एक हरयाली और एक उल्लास सदैव बना रहता है |

सफलता जिस ताले में बंद रहती है, वह दो चाबियों से खुलता है,

सफलता जिस ताले में बंद रहती है, वह दो चाबियों से खुलता है,एक परिश्रम और दूसरा सत्प्रयास। कोई भी ताला बिना चाबी के खोला गया तो आगे उपयोगी नहीं रहेगा। इस प्रकार यदि परिश्रम और प्रयास का माददाअपने अंदर पैदा नहीं किया तो कोई भी थोपी सफलता टिक न सकेगी।

साधना क्षेत्र की सारी उपलब्धियाँ इस तथ्य पर निर्भर हैं कि मन को भटकने से रोककर, उददेश्यपूर्ण उत्कृष्ट चिंतन में नियोजित कर दिया जाए

साधना क्षेत्र की सारी उपलब्धियाँ इस तथ्य पर निर्भर हैं कि मन को भटकने से रोककर, उददेश्यपूर्ण उत्कृष्ट चिंतन में नियोजित कर दिया जाए। यह गहन प्रक्रिया जितनी सधन होगी, भाव, श्रद्धा से अभिपूरित होगी, सफलता उसी क्रम से हस्तगत होती चली जाएगी।

जीवन में सफलता की आकांक्षा रखने वालों को चाहिए कि सामयिक असफलता को एक चुनौती की भाँति स्वीकार करें

जीवन में सफलता की आकांक्षा रखने वालों को चाहिए कि सामयिक असफलता को एक चुनौती की भाँति स्वीकार करें और अपनी सृजनशक्ति के बल पर असफलता को सफलता में बदल देने का संकल्प लेकर अपने उधोग को और अधिक बढ़ा देने का दृढ़ निश्चय किया होता है,उसने मानों दूर तक अपनी मंजिल का मार्ग स्पष्ट और निरापद बना लिया होता है।

ईमानदारी और श्रमशीलता का यह भी अर्थ है कि अपने श्रम के उचित मूल्य से अधिक की आकांक्षा

ईमानदारी और श्रमशीलता का यह भी अर्थ है कि अपने श्रम के उचित मूल्य से अधिक की आकांक्षा – अपेक्षा न की जाए । यह निष्ठा यदि विकसित कर ली जाए तो व्यक्ति प्रगति के उच्च सोपान पर चढ़ता चला जाता है।

असफलता की चिंता मत करो ,वो बिलकुल स्वाभाविक हैं ।

असफलता की चिंता मत करो ,वो बिलकुल स्वाभाविक हैं ।वो असफलताएँ जीवन के सोंदर्य हैं ।उनके बिना जीवन क्या होगा ?जीवन में यदि संघर्ष न रहे तो जीवित रहना ही व्यर्थ है ।संघर्ष और त्रुटियों की परवाह मत करो ।असफलताओं पर ध्यान मत दो ,ये छोटी – छोटी फिसलने है ।आदर्श को सामने रखकर हर बार आगे बढ़ने का प्रयत्न करो ।यदि तुम हज़ार बार भी असफल होते हो तो एक बार फिर प्रयत्न करो ।