मन की शक्ति

मन की शक्तियों को एकाग्र करने के सिवा अन्य किस विधि से संसार के ये सब ज्ञान उपलब्ध हुए हैं? यदि केवल इतना ज्ञात हो गया कि प्रकृति के द्वार को कैसे खटखटाया जाए-उस पर कैसे दस्तक दी जाए, तो बस,प्रकृति अपने सारे रहस्य खोल देती है| उस आघात की शक्ति और तीव्रता एकाग्रता से ही आती है। मानव मन की शक्ति असीम है| वह जितना ही एकाग्र होता है उतनी ही उसकी शक्ति एक लक्ष्य पर केंद्रित होती है,यही रहस्य है|

संकल्प बल

प्रतिकूलताओं कितनी हीं बड़ी क्यों न हों जीव उन सबसे लड़ सकने में समर्थ है। उसका संकल्प बल ऐसी परीस्थितियाँ पैदा कर सकता है, जिसमे असह्य को सह्य और असंभव को संभव बनाया जा सके। पग-पग पर आती रहने वाली कठिनाइयों को निरस्त करने में भी संकल्प बल की प्रखरता का तथ्य सदा ही सामने आता रहता है।

निरीक्षण

जीवन को उलट-पुलट कर देखो, पर उसमें चन्दन जैसी सुगंध आती दिखती है । भूतकालकी ओर गरदन मोड़कर देखते है तो शानदार दिखती है। वर्तमान की निरीक्षण करते है तो उसमे उमंगे उछलती दिखतीहै। भविष्य पर दूर दृष्टि डालते है तो प्रतीत होता है की भगवान के दरबार में अपराधी बनकर नहीं जाना पड़ेगा। परीक्षा में अच्छे नंबर लानेवाले विधार्थी और प्रतिस्पर्धा जीतने वाले खिलाड़ी की तरह उपहार ही मिलेगा।

सफल जीवन

सफल जीवन जीने की आकांक्षा यदि साकार करनी हो तो पहला कदम आत्म-निरीक्षण में उठाया जाना चाहिए। अपने विचारों, मान्यताओं, आस्थाओं आदि की समीक्षा करनी चाहिए और उनमें जितने भी अवांछनीय तत्व हों, उन्हें उन्मूलन करने के लिए जुट जाना चाहिए। यह तभी संभव है, जब उनकी स्थानपूर्ति के लिए सदविचारों के आरोपण की व्यवस्था बना ली जाए। कहना न होगा कि विचार-परिवर्तन के चार ही आधारा हैं – स्वाध्याय, सत्संग, मनन और चिंतन। इन्हें अपनाया जा सके तो जीवन का स्वरूप बदलेगा और अवसाद उत्कर्ष में परिणत होगा।

जीवन : एक खेत

जीवन एक खेत है। उसमें प्रगति और सफलता की फसल उगाई जानी है तो ऐसे विचारों का मनः क्षेत्र में आरोपण करना चाहिए जो प्रगति के लिए आवश्यक शक्ति का उद्भव कर सकें। साहस और पुरुषार्थ के बिना किसी को आगे बढ़ सकना संभव नहीं। आलस्य और अनियमितता का अवरोध रहते, कोई व्यक्ति किसी प्रयोजन में सफल नहीं हो सकता। इन दुर्बलताओं को हटाने के लिए खेत में खर-पतवार उखाड़ने जोतने की तरह हमें किसान का अनुकरण करना होगा।

सफलता

सफलता का द्वार उन लोगों के लिए है जो आशा,उत्साह, हिम्मत और शक्तिपूर्वक द्वार पर बैठी हुई दुर्बलता की सिंहनी को पछाड़ सकते हैं, जिनके मन में उत्साह नहीं, आशा नहीं और लड़ने की चाह नहीं, उनके लिए संसार में सर्वत्र डर ही डर ,असफलता ही असफलता है।

मनुष्य जीवन मे कई बार ऐसी विषम

मनुष्य जीवन मे कई बार ऐसी विषम पारिस्थितियाँ आती हैं, जब वह एक निर्णय सरलता से नहीं कर पाता। श्रेय के लिये, शक्तिप्राप्ति के लिए विजय और सफलता के लिए वह कोई उद्योग करना चाहता है, पर सांसारिक मोह, माया, आत्मिक दुर्बल्ता, निराशा और असफलता का भय उसे वह कार्य न करने को रोकता है।