मुस्कान एक आकर्षण है।

मुस्कान एक आकर्षण है, जिसमें चुंबक की तरह दूसरे का स्नेह, समर्थन और सहयोग आकर्षित कर लेने की क्षमता है। मुस्कान इस बात की प्रतीक है कि व्यक्ति अंतरंग क्षेत्र में सद्गुणों का भंडार भरे पड़ा है। ऐसे व्यक्ति की आँखें चमकती हैं। और दिखते हुए दाँत उन विशेषताओं की साक्षी देते हैं जो किसी का जीवन प्रगतिशील एवं सफल होने की भविष्यवाणी करते है।

मनुष्य का जीवन अनुपम है।

मनुष्य का जीवन अनुपम है। उसे स्रष्टा की सर्वोतम कलाकृति कहा गया है। उसमें इतना कौशल भरा पड़ा है जिसकी अन्य किसी से तुलना नहीं। उसे इतना साधन उपलब्ध है, मानो प्रकृति ने माता की तरह सारा स्नेह उसी पर निछावर कर दिया है।

वास्तविक गौरव वह है जो किसी के मन पर अपना छाप छोर सके।

वास्तविक गौरव वह है जो विचारशिलों द्वारा श्रद्धा-सम्मानपूर्वक सहज स्वाभाविक रूप में प्रदान किया जाए। ऐसी गरिमा सज्जनता-शालीनता के बदले ही उपलब्ध होती है। सद्गुणों की संपत्ति ही ऐसे ऊँचे स्तर की है कि उसके कारण अपनी छाप हर किसी के मन पर पड़ती है। इसी कि प्रतिक्रिया गौरव गरिमा के रूप में अपने को उपलब्ध होती है। इसी का प्रतिफल आत्मसंतोष के रूप में हस्तगत होता है।

अपनी विवेक बुद्धि का समुचित उपयोग करें।

किसी प्रगति अथवा उन्नति से ईर्ष्य न करते हुए हमें स्वयं अपनी उन्नति का पथ प्रशस्त करना है और यह होता तभी है जब हम अपनी विवेक बुद्धि का समुचित उपयोग करेंगे।

विचार करने की शक्ति का ही नाम मन है

जिस प्रकार ज्ञान का कोई स्वरूप नहीं है वह मन की ही एक शक्ति है उसी प्रकार मन का भी कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है| इच्छा और विचार करने की शक्ति का ही नाम मन है| इसलिए मनोनिग्रह के लिया मन को वश मे रखने के लिया सर्वोत्तम उपाय यह है ,की उसे निरंतर विचार निमग्न रखा जाए| वैराग्यभ्यास से मन का निरोध होता है| अभ्यास से उद्धत मन वश मे होता है वैराग्य से उसे निर्मल ,कोमल और शांत बनाया जा सकता है|

किसी भी काम को करने के अथक परिश्रम जरूरी है।

जो स्वतन्त्रता के आनंद की फसल चाहते है, उन्हें ऐसे बीज बोने और उसकी रक्षा करने के लिए अथक परिश्रम और अतोल बलिदान देना होगा। अन्ध विश्वास और रूढ़िवाद पर आधारित शासन जनहित का सम्पादन नहीं कर सकता और न उग्रवाद शासन अपनी रक्षा कर सकता है।

आंतरिक जीवन की महानता ही जीवन को जीने योग्य बनाती है।

आंतरिक जीवन की महानता ही जीवन को जीने योग्य बनाती है। आदर्शो का आंतरिक जीवन, कोमल भावनाओं, भावी उन्नति के सुखद स्वप्न, आत्म जिज्ञासा की प्राप्ति मनुष्य की वास्तविक संपत्ति है। आंतरिक व्यक्तित्व के विकाश द्वारा ही मनुष्य मानवी विभूतियों से परिपूर्ण होता है।

मनुष्य की सोच

विचार आपसे कहते है हमे मन के जेलखाने मे ही घोट कर मत मारिए, वरन शरीर के कार्यो द्वारा जगत मे आने दीजिए। मनुष्य उत्तम लेखक ,योग्य वक्ता ,उच्च कालविद वह जो भी चाहे सरलतापूर्वक बन सकता है, लेकिन एक शर्त है की वह अपने शुभ संकल्पो को क्रियाशील कर दे| उन्हें दैनिक जीवन में भी कर दिखाए| जो कुछ सोचता-विचारता है, उसे परिश्रम द्वारा, अपनी सामर्थ्य द्वारा साक्ष्य का रूप प्रदान करे। शुद्ध विचारो की उपयोगिता तभी प्रकट होगी,जब अन्तःकरण के चित्रों को शरीर के कार्यो द्वारा क्रियान्वित करने का प्रयत्न किया जायेगा।

अपने मे त्याग की भावना हो तो किसी से संघर्ष करने जरूरत नहीं पड़ती

त्याग भावना को, प्रेम व्यवहार को, प्रमुख नीति बना लेने पर किसी से संघर्ष होने का अवसर उपस्थित नहीं होता और न शाप एवं घृणा के शब्द बेधी बाण आत्मा को हर घड़ी घायल करते है वरन दूसरों के आशीर्वाद, शुभ संकल्प सद्भाव देवताओं की भांति पुष्प वृष्टि करते है ।

संकल्प के द्वारा प्रत्येक मनुष्य जय, जीवन और सफलता प्राप्त कर सकता है ।

शक्ति का स्रोत साधनों मे नहीं संकल्प मे है। यदि उन्नति करने की आगे बढ्ने की इच्छाए तीव्र हो रही होंगी तो आपको जिस साधनों का अभाव दिखलाई पड़ता है, वे निश्चित ही दूर दिखाई देंगे। संकल्प में सूर्य रश्मियों का तेज है, वह जाग्रत चेतना का शिंगार है, विजय का हेतु और सफलता का जनक है, दृढ़ संकल्प से स्वल्प साधनो मे भी मनुष्य अधिकतम विकाश कर सकता है और मस्ती का जीवन बिता सकता है। संकल्प के द्वारा प्रत्येक मनुष्य जय, जीवन और सफलता प्राप्त कर सकता है।